ट्रंप प्रशासन ने भारतीय कंपनियों और कारोबारियों पर लगाया प्रतिबंध, तुर्किये की फर्म पर भी कार्रवाई; ईरान से जुड़े नेटवर्क पर शिकंजा
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाते हुए भारत और तुर्किये में स्थित कंपनियों तथा कुछ व्यक्तियों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने आरोप लगाया है कि भारत में सक्रिय एक नेटवर्क ने ईरान के तेल कारोबार में शामिल प्रतिबंधित जहाजों को फर्जी समुद्री पहचान और प्रमाणपत्र उपलब्ध कराकर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने में मदद की। यह कार्रवाई ट्रंप प्रशासन के 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' का हिस्सा है।
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के मुताबिक, इस कार्रवाई में भारत के चंडीगढ़ में रहने वाले सुनील कुमार शर्मा, उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद और उनके कारोबारी नेटवर्क से जुड़े दो अन्य भारतीय नागरिकों को निशाना बनाया गया है। इसके अलावा शर्मा से जुड़ी नौ संस्थाओं पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि इस नेटवर्क ने गयाना, इस्वातिनी और लाओस जैसे देशों के नाम पर कथित फर्जी समुद्री रजिस्ट्रेशन और प्रमाणपत्र जारी किए।
अमेरिका का दावा है कि इन दस्तावेजों के जरिए ईरानी पेट्रोलियम ले जाने वाले प्रतिबंधित जहाजों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान छिपाकर संचालन जारी रखने में मदद मिली। अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह नेटवर्क कम से कम 2014 से सक्रिय था और इसके लिए आधिकारिक समुद्री रजिस्ट्रियों जैसी दिखने वाली वेबसाइटें भी तैयार की गई थीं।
भारत के अलावा तुर्किये की कंपनी फुगो ग्राउंड सर्विसेज इंक पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि यह कंपनी ईरान की प्रतिबंधित विमानन कंपनियों को ग्राउंड हैंडलिंग और अन्य सेवाएं उपलब्ध करा रही थी। इनमें ईरान एयर टूर, साहा एयरलाइंस, तबान एयरलाइंस और अता एयरलाइंस शामिल हैं।
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि वॉशिंगटन ईरानी सरकार को आर्थिक मदद पहुंचाने वाले नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगा। प्रतिबंधों के तहत संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं की अमेरिका में मौजूद संपत्तियां फ्रीज की जा सकती हैं और अमेरिकी नागरिकों तथा कंपनियों के साथ उनके कारोबारी लेन-देन पर रोक लग जाती है।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिका ईरान की तेल से होने वाली कमाई को रोकने के लिए लगातार दबाव बढ़ा रहा है। हालांकि, प्रतिबंधों की घोषणा अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की बड़ी सफलता के एक दिन बाद हुई, लेकिन इस कार्रवाई को चुनावी नतीजों से जोड़ने का कोई आधिकारिक आधार सामने नहीं आया है। इसलिए इसे ट्रंप की चुनावी हार की प्रतिक्रिया बताना फिलहाल अटकल होगी।
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