गोवा एसआईआर विवाद: हाईकोर्ट का चुनाव आयोग को आदेश, 10 दिन में छह मतदाताओं के नाम बहाल करने होंगे
पणजी। गोवा में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान छह मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा निवास की पुष्टि किए जाने के बाद छहों मतदाताओं के नाम 10 दिनों के भीतर मतदाता सूची में दोबारा शामिल किए जाएं। कोर्ट ने अपने आदेश पर रोक लगाने की आयोग की मांग भी खारिज कर दी।
न्यायमूर्ति वाल्मीकि मेनेजेस और न्यायमूर्ति अमित जामसंदेकर की खंडपीठ ने चार दिनों तक चली सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। मामला उत्तरी गोवा के सांताक्रूज विधानसभा क्षेत्र के रहने वाले परेश सालगांवकर और उनके परिवार के पांच अन्य सदस्यों से जुड़ा है। परिवार ने आरोप लगाया था कि पता बदलने के लिए फॉर्म-8 जमा करने के बावजूद एसआईआर के दौरान उनके नाम मतदाता सूची से बाहर कर दिए गए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने फॉर्म-8 के आवेदनों को स्वचालित प्रणाली के जरिए खारिज किए जाने पर भी सवाल उठाए। पीठ ने कहा कि यदि कोई मतदाता अपना पता बदल चुका है, तो उससे पुराने पते पर रहने की घोषणा वाले गणना फॉर्म पर हस्ताक्षर करने की अपेक्षा नहीं की जा सकती। अदालत ने यह भी पूछा कि पता बदलने के लिए फॉर्म-8 देने वाले मतदाताओं को नए मतदाता के रूप में फॉर्म-6 भरने के लिए क्यों कहा जा रहा है।
निर्वाचन आयोग की ओर से दलील दी गई कि एसआईआर के तहत मतदाता सूची नए सिरे से तैयार की जाती है और पुराने रिकॉर्ड अपने आप नई सूची में शामिल नहीं होते। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस मामले को दूसरे राज्यों में एसआईआर की वैधता को लेकर चल रही याचिकाओं से अलग माना, क्योंकि गोवा में पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
आयोग के वकील ने फैसले पर रोक लगाने की मांग की, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया। पीठ ने स्पष्ट किया कि मतदाताओं के नाम बहाल करने के आदेश पर रोक नहीं लगाई जाएगी। इस फैसले को गोवा में एसआईआर के दौरान नाम छूटने और पता परिवर्तन से जुड़े मामलों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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