रामपुर जौहर ट्रस्ट की 1,170 करोड़ की संपत्तियों पर निगाहें, अंतिम जब्ती का फैसला विशेष अदालत करेगी
लखनऊ। रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय और मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से जुड़ी करीब 1,170 करोड़ रुपये की बाजार कीमत वाली संपत्तियों को लेकर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धनशोधन के मामले में विश्वविद्यालय की जमीन और इमारतों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। अब इस कार्रवाई की पुष्टि के लिए मामला न्याय निर्णायक प्राधिकरण के समक्ष पहुंचेगा, जहां पक्षकारों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।
ईडी के मुताबिक, कुर्क की गई संपत्तियों का मूल्य 426.46 करोड़ रुपये आंका गया है, जबकि उनका मौजूदा बाजार मूल्य करीब 1,170 करोड़ रुपये है। एजेंसी का आरोप है कि विश्वविद्यालय परिसर के निर्माण में सरकारी धन और संसाधनों का दुरुपयोग किया गया तथा ठेकेदारों से मिली रकम को ट्रस्ट तक दान के रूप में पहुंचाया गया। ट्रस्ट और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ धनशोधन की जांच जारी है।
धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत न्याय निर्णायक प्राधिकरण यह तय करेगा कि कुर्क की गई संपत्तियां धनशोधन से जुड़ी हैं या नहीं। यदि प्राधिकरण अस्थायी कुर्की की पुष्टि करता है, तो संपत्तियां विशेष अदालत में मुकदमे की सुनवाई पूरी होने तक कुर्क रह सकती हैं। संपत्तियों को अंतिम रूप से जब्त करने या उन्हें मुक्त करने का फैसला विशेष अदालत करेगी।
इस मामले में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मोहम्मद आजम खां तथा मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट का नाम जांच के दायरे में है। ईडी ने 31 अक्टूबर को आजम खां को धनशोधन मामले में गिरफ्तार किया था और उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया। एजेंसी की कार्रवाई और आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
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