तिरुपति लड्डू घी मिलावट मामला: सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल दूसरे राज्य में भेजने की याचिका खारिज की
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने तिरुपति मंदिर के लड्डुओं में कथित घी मिलावट के मामले की सुनवाई आंध्र प्रदेश से बाहर स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने गुरुवार को महाराष्ट्र के डेयरी कारोबारी और मामले के आरोपी माचिंद्र शांताराम लंके की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि मुकदमे को किसी दूसरे राज्य में भेजने का पर्याप्त आधार नहीं है।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने दलील दी कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री सहित कई राजनीतिक नेता लगातार इस मामले पर बयान दे रहे हैं। इससे राज्य में राजनीतिक रूप से संवेदनशील माहौल बन गया है और निष्पक्ष सुनवाई प्रभावित होने की आशंका है। उन्होंने मुकदमे को किसी पड़ोसी राज्य में स्थानांतरित करने की मांग की।
वकील ने यह भी कहा कि फॉरेंसिक रिपोर्ट में घी में पशु वसा की मौजूदगी से इनकार किए जाने के बावजूद राजनीतिक बयानबाजी जारी है। उन्होंने दलील दी कि अधिकांश आरोपी उत्तर भारत से हैं और आंध्र प्रदेश में भाषा संबंधी परेशानी भी हो सकती है।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले की जांच उसी विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने की है, जिसका गठन शीर्ष अदालत ने स्वयं किया था। पीठ ने यह भी ध्यान दिया कि अधिकांश गवाह और मामले से जुड़े साक्ष्य आंध्र प्रदेश में ही मौजूद हैं। अदालत ने कहा कि मुकदमे को दूसरे राज्य में स्थानांतरित करने का कोई आधार नहीं बनता और याचिका खारिज कर दी।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालत पहले ही इस मामले में राजनीतिक बयानबाजी को लेकर आदेश दे चुकी है। उन्होंने याचिकाकर्ता से कहा कि यदि आगे कोई समस्या होती है तो वह फिर अदालत का रुख कर सकते हैं।
गौरतलब है कि तिरुपति मंदिर के प्रसाद के लड्डू बनाने में इस्तेमाल होने वाले घी में पशु वसा मिलाए जाने के आरोपों के बाद विवाद खड़ा हुआ था। मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2024 में सीबीआई, आंध्र प्रदेश पुलिस और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के अधिकारियों वाली स्वतंत्र एसआईटी गठित की थी। मामले में लगाए गए आरोपों और उनकी जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगा।
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