महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी एप केस: सह-संस्थापक रवि उप्पल यूएई में गिरफ्तार, भारत लाने के लिए शुरू हुई प्रत्यर्पण प्रक्रिया
नई दिल्ली। महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी एप मामले में भारतीय जांच एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। इस मामले के सह-प्रमोटर और प्रमुख आरोपी रवि उप्पल को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में गिरफ्तार किया गया है। भारतीय एजेंसियां अब उसे भारत लाने के लिए प्रत्यर्पण की प्रक्रिया में जुटी हैं। अधिकारियों के मुताबिक, दुबई पुलिस ने 46 वर्षीय उप्पल को भारतीय एजेंसियों की ओर से जारी इंटरपोल रेड नोटिस के आधार पर गिरफ्तार किया।
यह कार्रवाई उसके करीबी सहयोगी और महादेव एप के दूसरे सह-प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लाए जाने के कुछ दिनों बाद हुई है। एक नवंबर को ओमान की अदालत से प्रत्यर्पण की मंजूरी मिलने के बाद सीबीआई की टीम चंद्राकर को भारत लेकर आई थी। रायपुर की विशेष अदालत ने बुधवार को उसे आठ दिन की सीबीआई हिरासत में भेज दिया।
जांच एजेंसियों के अनुसार, रवि उप्पल और सौरभ चंद्राकर छत्तीसगढ़ के भिलाई के रहने वाले हैं। दोनों ने 2019-20 के दौरान महादेव ऑनलाइन बुक नेटवर्क शुरू किया था। आरोप है कि कोरोना महामारी के दौरान इस नेटवर्क का विस्तार तेजी से हुआ और हजारों पैनलों के जरिए देशभर में अवैध सट्टेबाजी का संचालन किया गया।
ईडी की जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क से अर्जित कथित अपराध की रकम को कई स्तरों पर बैंक खातों और हवाला के जरिए विदेश भेजा जाता था। एजेंसी ने दोनों को इस नेटवर्क के प्रमुख संचालकों में शामिल बताया है। जुलाई 2026 में सीबीआई ने महादेव एप से जुड़े मामलों में कई आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र भी दाखिल किए थे।
रवि उप्पल के खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस अक्टूबर 2023 में जारी हुआ था। इससे पहले दिसंबर 2023 में भी उसे यूएई में हिरासत में लिया गया था, लेकिन बाद में वह वहां से निकलकर वानुअतु पहुंच गया था। जांच एजेंसियों के अनुसार, उप्पल और चंद्राकर के पास वानुअतु के पासपोर्ट भी थे। हाल में उप्पल के दोबारा यूएई पहुंचने के बाद दुबई अधिकारियों ने उसे गिरफ्तार किया।
महादेव एप नेटवर्क से जुड़े अपराध की रकम को लेकर जांच एजेंसियों के अलग-अलग आकलन सामने आए हैं। शुरुआती रिपोर्टों में करीब 80 हजार करोड़ रुपये के अपराध से जुड़े लेनदेन का अनुमान बताया गया है। हालांकि, यह आंकड़ा कथित नेटवर्क से जुड़े लेनदेन और अपराध की रकम के आकलन से संबंधित है, इसे किसी अदालत द्वारा साबित नुकसान या अंतिम जब्ती की रकम नहीं माना जाना चाहिए।
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