लद्दाख प्रशासन के नोटिस पर भड़के सोनम वांगचुक, बोले- स्कूल बंद करो और शराब के बार खोलो; कार्रवाई को बताया 'शाही फरमान'
लद्दाख में शिक्षा और प्रशासनिक नीतियों को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक ने लेह के फ्यांग स्थित डेजर्ट फ्लावर स्कूल की गतिविधियों पर रोक लगाने संबंधी प्रशासनिक नोटिस की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इस कार्रवाई को 'शाही फरमान' बताते हुए सोशल मीडिया पर तंज कसा और कहा, 'स्कूल बंद करो और शराब के बार खोलो।'
दरअसल, लद्दाख प्रशासन के तहसीलदार कार्यालय ने 1 नवंबर को हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स लद्दाख (HIAL) की सह-संस्थापक और सीईओ गीतांजलि जे. आंगमो को नोटिस जारी किया था। इसमें कहा गया कि फ्यांग स्थित डेजर्ट फ्लावर स्कूल में आवश्यक अनुमति, मंजूरी और संबंधित अधिकारियों की सहमति के बिना कक्षाएं और अन्य गतिविधियां शुरू की गई हैं। प्रशासन ने संस्थान को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट में लंबित मामले का हवाला देते हुए अंतिम निर्णय आने तक स्कूल की गतिविधियों को आगे नहीं बढ़ाने और यथास्थिति बनाए रखने की सलाह दी है।
यह विवाद HIAL को फ्यांग में आवंटित 1,076 कनाल जमीन के पट्टे को रद्द किए जाने से भी जुड़ा है। प्रशासन ने अगस्त 2025 में जमीन का आवंटन रद्द कर दिया था, जिसके खिलाफ संस्थान ने हाईकोर्ट का रुख किया। मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है। प्रशासन का कहना है कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक स्कूल की गतिविधियों को आगे बढ़ाने से लंबित मामले पर असर पड़ सकता है।
वांगचुक ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि HIAL के शैक्षणिक कार्यों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। उन्होंने दावा किया कि संसद की शिक्षा संबंधी समिति ने संस्थान के मॉडल को देशभर में अपनाने की सिफारिश की थी। इसके अलावा लंदन के विक्टोरिया एंड अल्बर्ट म्यूजियम में संस्थान के कार्यों को जगह मिली है और टाइम मैगजीन ने भी इसकी परियोजनाओं को अपने 100 जलवायु समाधानों में शामिल किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी संस्था की गतिविधियों को रोकने की कोशिश क्यों की जा रही है।
वांगचुक ने स्कूल पर कार्रवाई को लद्दाख में उठने वाली असहमति की आवाजों को दबाने की कोशिश भी बताया। उन्होंने शराब नीति का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि एक तरफ शैक्षणिक गतिविधियों पर रोक लगाई जा रही है, वहीं दूसरी तरफ शराब से जुड़े प्रतिष्ठानों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
हालांकि, लद्दाख प्रशासन ने शराब नीति को लेकर वांगचुक के पहले लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। प्रशासन का कहना है कि नई आबकारी नीति को अगस्त 2026 में वापस ले लिया गया था और पुरानी नीति बहाल कर दी गई थी। प्रशासन के अनुसार, पूरे लद्दाख में केवल एक शराब की दुकान संचालित है। स्कूल और जमीन आवंटन से जुड़ा विवाद अब हाईकोर्ट के फैसले पर निर्भर है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले पर प्रशासन और HIAL के बीच टकराव बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
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