फर्जी सरकारी टेंडर के नाम पर 14.55 करोड़ की ठगी, निलंबित IAS अभिषेक चंद्र के ठिकानों पर ED की छापेमारी
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित फर्जी सरकारी टेंडर घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के 13 ठिकानों पर छापेमारी की। बुधवार, 4 नवंबर को की गई इस कार्रवाई में निलंबित आईएएस अधिकारी अभिषेक चंद्र के आवास सहित कई अन्य ठिकानों की तलाशी ली गई। जांच एजेंसी ने बड़ी संख्या में दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड जब्त किए हैं।
ईडी के अनुसार, यह मामला नागपुर की एसके सेल्स कॉर्पोरेशन की शिकायत से जुड़ा है। आरोप है कि सितंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच कंपनी से त्रिपुरा सरकार के मिड-डे मील और बिजली क्षेत्र से संबंधित कथित टेंडरों के लिए करीब 14.55 करोड़ रुपये की अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट (ईएमडी) जमा कराई गई। जांच में सामने आया कि सरकार की ओर से ऐसे कोई टेंडर जारी ही नहीं किए गए थे।
जांच एजेंसी का आरोप है कि निलंबित आईएएस अभिषेक चंद्र ने खुद को त्रिपुरा सरकार की टेंडर प्रक्रिया नियंत्रित करने वाला अधिकारी बताकर कंपनी का परिचय उत्पल कुमार चौधरी से कराया। भुगतान के लिए 'डायरेक्टोरेट ऑफ हायर एजुकेशन' के नाम पर डिमांड ड्राफ्ट जमा कराए गए। हालांकि, जांच में यह नाम किसी सरकारी विभाग का नहीं, बल्कि चौधरी के निजी प्रतिष्ठान का पाया गया। आरोप है कि असली सरकारी विभाग से मिलता-जुलता नाम रखकर कंपनी को भ्रमित किया गया और फर्जी टेंडर नोटिस व वर्क ऑर्डर के जरिए भुगतान कराया गया।
ईडी के मुताबिक, जमा की गई रकम को कई शेल कंपनियों के माध्यम से अलग-अलग खातों में भेजा गया। जांचकर्ताओं को संदेह है कि इस धनराशि का इस्तेमाल फ्लैट और मुंबई के शिवाजी पार्क इलाके में आवासीय संपत्ति खरीदने के लिए किया गया। कुछ संपत्तियां कथित तौर पर अभिषेक चंद्र के परिवार के सदस्यों के नाम पर खरीदी गईं। एजेंसी ने संदिग्ध हवाला लेन-देन, महंगी संपत्तियों और कंपनियों पर कथित नियंत्रण से जुड़े दस्तावेज भी जब्त किए हैं।
ईडी ने बताया कि उत्पल कुमार चौधरी और अन्य लोगों के खिलाफ त्रिपुरा तथा पश्चिम बंगाल में दर्ज पांच अन्य एफआईआर से जुड़े एक अलग मामले की भी जांच चल रही है। इसमें इसी तरह के कथित तरीके से कई लोगों से 44 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी किए जाने का आरोप है। फिलहाल 14.55 करोड़ रुपये के मामले में जांच जारी है और आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
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