अमेरिका से व्यापार समझौते पर राहुल गांधी का मोदी पर गंभीर आरोप, बोले- किसानों और MSME का हित दबाव में दांव पर लगाया
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राहुल गांधी का दावा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में प्रधानमंत्री ने कुछ ही मिनटों में समझौते के लिए सहमति दे दी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस फैसले से पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल और संबंधित अधिकारियों से पर्याप्त विचार-विमर्श नहीं किया गया। राहुल ने यह भी दावा किया कि समझौते के जरिए भारतीय किसानों, छोटे कारोबारियों और MSME क्षेत्र के हितों से समझौता किया गया तथा देश के डेटा तक अमेरिका की पहुंच बढ़ाने का रास्ता खोला गया।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि अमेरिका के साथ बातचीत कई महीनों तक कृषि क्षेत्र को लेकर अटकी हुई थी। भारत सरकार अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए बाजार खोलने को लेकर सहमत नहीं थी, लेकिन बाद में प्रधानमंत्री ने अचानक समझौते पर सहमति जता दी। कांग्रेस नेता के मुताबिक, अमेरिका की ओर से लगाए गए टैरिफ और गौतम अडानी से जुड़े अमेरिकी मुकदमे का दबाव इस फैसले के पीछे हो सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने इस मामले में कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्रियों और नौकरशाही से चर्चा नहीं की।
किसानों और छोटे उद्योगों को लेकर चिंता
राहुल गांधी का कहना है कि अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में अधिक पहुंच मिलने से देश के किसानों पर दबाव बढ़ सकता है। उन्होंने सोयाबीन, मक्का, कपास, फल और अन्य कृषि उत्पादों का उल्लेख करते हुए कहा कि बड़े अमेरिकी कृषि उत्पादकों से प्रतिस्पर्धा छोटे और सीमांत भारतीय किसानों के लिए चुनौती बन सकती है। उन्होंने कपड़ा उद्योग और छोटे तथा मध्यम कारोबारों पर भी समझौते के संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठाए।
समझौते के डिजिटल प्रावधानों पर भी राहुल गांधी ने आपत्ति जताई। उनका आरोप है कि भारत ने अपने डेटा और डिजिटल व्यापार से जुड़े हितों पर पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना अमेरिका को रियायतें दी हैं। हालांकि, सार्वजनिक रूप से जारी संयुक्त बयान में डिजिटल व्यापार नियमों पर बातचीत करने की प्रतिबद्धता का उल्लेख है, लेकिन भारतीय नागरिकों का पूरा डेटा अमेरिका को सौंपे जाने की बात उसमें दर्ज नहीं है।
अडानी मामले से समझौते को जोड़कर लगाए आरोप
राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को उद्योगपति गौतम अडानी के खिलाफ अमेरिका में चल रहे मुकदमे से भी जोड़ा। उनका आरोप है कि प्रधानमंत्री ने अडानी को राहत दिलाने के लिए अमेरिकी दबाव में समझौते पर सहमति दी। यह आरोप राजनीतिक रूप से गंभीर है, लेकिन दोनों घटनाओं के बीच किसी प्रत्यक्ष सौदे या समझौते का प्रमाण सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
अडानी के खिलाफ अमेरिकी आपराधिक मामला अगस्त 2026 में अमेरिकी संघीय अदालत ने अभियोजन पक्ष के अनुरोध पर खारिज कर दिया था। इस फैसले से पहले न्यायाधीश ने यह सवाल भी उठाया था कि अमेरिका में 10 अरब डॉलर के निवेश के अडानी के पुराने वादे का मामला वापस लेने के निर्णय पर कोई प्रभाव पड़ा था या नहीं। हालांकि, न्यायाधीश ने कहा कि उन्हें ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला कि निवेश के वादे ने अभियोजन पक्ष के फैसले को प्रभावित किया। उन्होंने मामले को वापस लेने की प्रक्रिया में कुछ अनियमितताओं पर चिंता भी जताई थी।
व्यापार समझौते की वास्तविक स्थिति क्या है?
भारत और अमेरिका ने 7 फरवरी 2026 को एक अंतरिम व्यापार समझौते के ढांचे की घोषणा की थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ी। 15 अक्टूबर 2026 को भारत के व्यापार सचिव ने बताया कि समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप दिया जा चुका है और उसकी कानूनी भाषा तैयार करने का काम चल रहा है। उन्होंने कहा था कि दोनों देश जल्द से जल्द समझौते पर हस्ताक्षर करने की दिशा में काम कर रहे हैं। यानी उस समय तक इसे औपचारिक रूप से हस्ताक्षरित अंतिम समझौता नहीं बताया गया था।
इस तरह राहुल गांधी के आरोपों में किसानों, छोटे उद्योगों, डिजिटल व्यापार और अडानी मामले से जुड़े कई अलग-अलग मुद्दे शामिल हैं। सरकार की ओर से समझौते के प्रावधानों को लेकर अपना पक्ष रखा गया है, जबकि विपक्ष इसके संभावित आर्थिक और राजनीतिक प्रभावों पर सवाल उठा रहा है। समझौते के अंतिम कानूनी दस्तावेज और उसके लागू होने की शर्तें सामने आने के बाद ही इसके वास्तविक प्रभावों का आकलन किया जा सकेगा।
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