दिल्ली: पार्किंग विवाद से पुलिस-वकील टकराव और ACP के सस्पेंशन तक, कैसे बढ़ा मामला; पुलिस मुख्यालय के बाहर हुआ प्रदर्शन
नई दिल्ली। दिल्ली में एक मामूली पार्किंग विवाद से शुरू हुआ मामला अब पुलिस और वकीलों के बीच बड़े टकराव में बदल गया है। इस विवाद के चलते जहां जिला अदालतों के वकीलों ने हड़ताल की, वहीं पुलिसकर्मियों ने भी अपने अधिकारियों के समर्थन में पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। घटनाक्रम के बीच सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) मनस्वी वशिष्ठ को मंगलवार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। इस पूरे मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली, वकीलों के दबाव और विभागीय कार्रवाई को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं।
**23 अक्टूबर को शुरू हुआ विवाद**
मामले की शुरुआत 23 अक्टूबर को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के रोहताश नगर इलाके से हुई। शीतल ठाकुर और उनके पति राहुल ठाकुर के सैलून के प्रवेश द्वार के सामने एक बाइक खड़ी कर दी गई थी। राहुल ने बाइक हटाने को कहा तो दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हो गई। शीतल की बहन श्वेता भाटी ने आरोप लगाया कि बाइक सवार ने अभद्रता की। परिवार का दावा है कि उसी दिन बाद में कुछ वकील सैलून पहुंचे, वहां तोड़फोड़ की और शीतल के साथ मारपीट की। शीतल उस समय गर्भवती थीं।
परिवार के मुताबिक, शिकायत लेकर शाहदरा थाने पहुंचने पर उनकी शिकायत पर तत्काल एफआईआर दर्ज नहीं की गई। श्वेता ने आरोप लगाया कि इसी दौरान थाने में कुछ वकीलों ने उनके पति विजय और बहनोई राहुल के साथ मारपीट की। परिवार का कहना है कि पुलिसकर्मियों ने बीच-बचाव की कोशिश की। हालांकि, इस घटनाक्रम को लेकर दोनों पक्षों के आरोप अलग-अलग हैं।
**थाने में वकील के घायल होने के बाद बढ़ा विवाद**
वकीलों के संगठन के अनुसार, इसी घटनाक्रम के दौरान अधिवक्ता ललित बंसल के सिर में गंभीर चोट आई थी। वकीलों का आरोप है कि पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं की। उनका यह भी दावा है कि जब वे इस मामले को लेकर थाने पहुंचे तो ACP मनस्वी वशिष्ठ ने अपना सर्विस रिवॉल्वर दिखाकर उन्हें धमकाया। इसी आरोप को लेकर दिल्ली की जिला अदालतों के वकीलों ने अनिश्चितकालीन न्यायिक कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया था।
दूसरी ओर, ACP वशिष्ठ की शिकायत पर भी 15 से 20 वकीलों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि वकीलों ने थाने में पुलिस अधिकारियों के साथ अभद्रता की, सरकारी काम में बाधा डाली और SHO को खींचने की कोशिश की। पुलिस अधिकारी ने आरोप लगाया कि वकील जांच को प्रभावित करने का दबाव बना रहे थे।
**28 अक्टूबर को तबादले, वकीलों की हड़ताल खत्म**
विवाद के बाद 28 अक्टूबर को ACP मनस्वी वशिष्ठ का तबादला विशेष पुलिस इकाई महिला एवं बाल (SPUWAC) में कर दिया गया, जबकि शाहदरा थाने के SHO इंस्पेक्टर अरुण कुमार को सुरक्षा इकाई में भेज दिया गया। इसके बाद दिल्ली की जिला अदालतों के वकीलों ने अपना अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार समाप्त कर दिया।
**2 नवंबर को पुलिसकर्मियों का प्रदर्शन**
अधिकारियों के तबादले से नाराज पुलिसकर्मियों ने 2 नवंबर को दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। शुरुआत में करीब 100 पुलिसकर्मी जुटे, जबकि बाद में पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार के साथ हुई बैठक में लगभग 500 पुलिसकर्मियों के शामिल होने की खबर सामने आई। प्रदर्शनकारियों ने अपने अधिकारियों के समर्थन में नारे लगाए और पुलिसकर्मियों की गरिमा, जांच में हस्तक्षेप तथा वकीलों के साथ विवाद की स्थिति में स्पष्ट प्रक्रिया बनाने की मांग रखी।
इस दौरान ACP वशिष्ठ ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया और पुलिसकर्मियों की शिकायतों को सामने रखा। उन्होंने पुलिस थानों में वकीलों के समूहों के प्रवेश और पुलिस अधिकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाने की मांग की।
**प्रदर्शन के अगले दिन ACP निलंबित**
3 नवंबर को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ACP मनस्वी वशिष्ठ को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई पुलिस मुख्यालय पर हुए प्रदर्शन के एक दिन बाद हुई। इसी घटनाक्रम के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट में एक वकील ने ACP के कथित बयानों और AK-47 का जिक्र करते हुए अदालत से स्वतः संज्ञान लेने की मांग की। हाईकोर्ट ने फिलहाल स्वतः संज्ञान लेने से इनकार करते हुए संबंधित पक्ष को औपचारिक याचिका दाखिल करने के लिए कहा।
इस पूरे विवाद में पुलिसकर्मियों और वकीलों, दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ऐसे में थाने के सीसीटीवी फुटेज, दर्ज एफआईआर और जांच के निष्कर्ष मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में अहम हो सकते हैं। फिलहाल ACP का निलंबन और पुलिसकर्मियों का प्रदर्शन इस विवाद को एक नए मोड़ पर ले आया है।
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