सुप्रीम कोर्ट ने बागी टीएमसी विधायकों की सदस्यता पर सीधे सुनवाई से किया इनकार, कलकत्ता हाईकोर्ट को जल्द फैसला लेने के निर्देश
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 10 बागी विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को याचिकाकर्ता को कलकत्ता हाईकोर्ट जाने को कहा। अदालत ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मामले को तत्काल सुनवाई के लिए डिवीजन बेंच के समक्ष सूचीबद्ध करने और शीघ्र निर्णय लेने का अनुरोध किया।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ टीएमसी विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष पर 10 बागी विधायकों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं पर निर्णय लेने में देरी का आरोप लगाया गया था। याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि अयोग्यता संबंधी याचिकाएं 8 जुलाई को दाखिल की गई थीं, लेकिन पांच महीने बीतने के बाद भी कोई निर्णय नहीं लिया गया।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने कहा कि याचिकाकर्ता को कतार से आगे निकलने के लिए मुकदमेबाजी नहीं करनी चाहिए। पीठ ने यह भी कहा कि केवल इसलिए कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले इस मामले में आदेश दिया था, हर याचिका सीधे शीर्ष अदालत में नहीं लाई जा सकती। इसके बाद अदालत ने याचिकाकर्ता को कलकत्ता हाईकोर्ट में उचित याचिका दाखिल करने की अनुमति दी और मामले पर शीघ्र विचार करने का अनुरोध किया।
इससे पहले 28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने इसी विवाद से जुड़ी याचिका पर कहा था कि उसे विधानसभा अध्यक्ष के निर्णय लेने को लेकर संदेह करने का कोई कारण नहीं है। अदालत ने उस समय कहा था कि अयोग्यता संबंधी याचिकाओं पर सामान्यतः तीन महीने के भीतर निर्णय लिया जाना चाहिए और उम्मीद जताई थी कि अध्यक्ष निर्धारित समयसीमा के भीतर उचित फैसला लेंगे।
मामले में जिन 10 विधायकों की सदस्यता को चुनौती दी गई है, उनमें रितब्रत बनर्जी, फिरहाद हकीम, अरूप रॉय, संदीपन साहा, अखरुज्जमान अंसारी, शिउली साहा, सबीना यास्मीन, बिप्लब मित्रा, जावेद खान और रथिन घोष शामिल हैं। इन विधायकों पर टीएमसी के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद पार्टी से अलग होकर दूसरे गुट में शामिल होने का आरोप है। याचिकाकर्ता ने संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच की सुनवाई और उसके फैसले पर नजर रहेगी।
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