अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेट्स का दोनों सदनों पर कब्जा, फिर भी ट्रंप क्यों जता रहे भरोसा? वीटो पावर से रोक सकते हैं बिल
वॉशिंगटन। अमेरिका के 2026 के मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका देते हुए प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) और सीनेट, दोनों में बहुमत हासिल कर लिया है। इस नतीजे से ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के बाकी दो वर्षों में उनकी विधायी योजनाओं के सामने चुनौतियां बढ़ सकती हैं। इसके बावजूद ट्रंप ने अपनी राजनीतिक स्थिति को लेकर भरोसा जताया है। उनका कहना है कि जरूरत पड़ने पर वह राष्ट्रपति के वीटो अधिकार का इस्तेमाल कर डेमोक्रेट्स के विधेयकों को रोकेंगे।
ट्रंप ने चुनाव परिणाम आने से पहले CBS News को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि उनके पास वीटो नाम की बड़ी शक्ति है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि डेमोक्रेट्स कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत हासिल करते हैं और ऐसे विधेयक लाते हैं जिनसे वह सहमत नहीं हैं, तो वह उन्हें मंजूरी देने से इनकार कर सकते हैं। ट्रंप का मानना है कि लगातार वीटो के इस्तेमाल से विपक्ष को अंततः उनके साथ समझौता करने के लिए बातचीत करनी पड़ सकती है। उन्होंने चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवारों के प्रदर्शन को लेकर भी आशावादी रुख दिखाया और कहा कि यदि वह खुद बैलेट पर होते तो उनकी पार्टी बड़े अंतर से जीतती।
क्या है राष्ट्रपति की वीटो पावर?
अमेरिकी संविधान के अनुच्छेद-1 की धारा-7 के तहत राष्ट्रपति को कांग्रेस से पारित किसी विधेयक को वीटो करने का अधिकार प्राप्त है। जब हाउस और सीनेट किसी विधेयक को मंजूरी देकर राष्ट्रपति के पास भेजते हैं, तो राष्ट्रपति उसे कानून बनने से रोकने के लिए वापस कांग्रेस को भेज सकते हैं और इसके साथ अपनी आपत्तियां भी बता सकते हैं। राष्ट्रपति को विधेयक पर फैसला लेने के लिए रविवार को छोड़कर 10 दिन का समय मिलता है।
हालांकि, राष्ट्रपति का वीटो अंतिम फैसला नहीं होता। कांग्रेस के दोनों सदन यदि दो-तिहाई बहुमत से उसी विधेयक को दोबारा पारित कर दें, तो राष्ट्रपति के वीटो के बावजूद वह कानून बन सकता है। यानी हाउस और सीनेट, दोनों में पर्याप्त समर्थन होने पर सांसद राष्ट्रपति के फैसले को पलट सकते हैं। इसके अलावा पॉकेट वीटो का प्रावधान भी है। यदि कांग्रेस के स्थगित होने के कारण राष्ट्रपति विधेयक को वापस नहीं भेज पाते और निर्धारित समय में उस पर हस्ताक्षर भी नहीं करते, तो वह विधेयक कानून नहीं बनता।
डेमोक्रेट्स की जीत से ट्रंप को क्या चुनौती मिलेगी?
कांग्रेस के दोनों सदनों पर डेमोक्रेट्स का नियंत्रण होने से ट्रंप प्रशासन की विधायी योजनाओं को आगे बढ़ाना कठिन हो सकता है। विपक्षी सांसद सरकार के कामकाज की जांच, प्रशासनिक फैसलों पर निगरानी और राष्ट्रपति के नामांकन से जुड़े मामलों में अधिक प्रभाव डाल सकेंगे। बजट और नए कानूनों को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच टकराव की आशंका है।
हालांकि, चुनाव में जीत के बावजूद डेमोक्रेट्स राष्ट्रपति की सभी शक्तियों को नियंत्रित नहीं कर पाएंगे। ट्रंप के पास विधेयकों को वीटो करने और संविधान तथा कानून के दायरे में कार्यकारी आदेश जारी करने के अधिकार बने रहेंगे। नई कांग्रेस 3 जनवरी 2027 से कार्यभार संभालेगी। तब तक मौजूदा कांग्रेस ही काम करती रहेगी।
इसलिए चुनावी नतीजों के बाद ट्रंप के आत्मविश्वास को जीत की खुशी के बजाय इस बात से जोड़कर देखा जा सकता है कि राष्ट्रपति पद पर रहते हुए उनके पास अब भी कई संवैधानिक अधिकार हैं। आने वाले समय में व्हाइट हाउस और कांग्रेस के बीच कानून, बजट और प्रशासनिक फैसलों को लेकर राजनीतिक खींचतान बढ़ सकती है।
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