ग्रेटर नोएडा PNB घोटाला: बैंक कर्मचारी दीपांशी और सहयोगी गिरफ्तार, खाताधारकों के 10.24 करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप
ग्रेटर नोएडा। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की ग्रेटर नोएडा स्थित सेक्टर पाई-1 शाखा में ग्राहकों के खातों से करोड़ों रुपये की कथित हेराफेरी का मामला सामने आया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस मामले में बैंक की ऑफिस असिस्टेंट दीपांशी शर्मा और उसके कथित सहयोगी आशुतोष कुमार पाठक को गिरफ्तार किया है। बैंक की प्रारंभिक जांच में अब तक करीब 10.24 करोड़ रुपये के अनधिकृत लेनदेन की पहचान हुई है। हालांकि, कुछ खाताधारकों ने करीब 35 करोड़ रुपये गायब होने की आशंका जताई है। बैंक के मुताबिक, वास्तविक नुकसान का आकलन करने के लिए खातों का मिलान अभी जारी है।
जांच के अनुसार, कथित गड़बड़ी पिछले करीब तीन वर्षों से चल रही थी। आरोप है कि दीपांशी ने बैंक के छह अन्य अधिकारियों की यूजर आईडी और पासवर्ड का दुरुपयोग कर ग्राहकों के बचत खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से अनधिकृत लेनदेन किए। रकम को अलग-अलग खातों के माध्यम से कथित तौर पर आशुतोष पाठक और अन्य लोगों से जुड़े खातों तक पहुंचाया गया। बैंक की शिकायत में कई अन्य व्यक्तियों के नाम भी सामने आए हैं, हालांकि उनकी भूमिका की जांच की जा रही है।
खातों की जानकारी और ट्रांजेक्शन अलर्ट में कथित बदलाव
बैंक की शिकायत के मुताबिक, ग्राहकों को लेनदेन की सूचना मिलने से रोकने के लिए कुछ खातों में मोबाइल ट्रांजेक्शन अलर्ट बंद या परिवर्तित किए गए थे। खातों से जुड़े संपर्क विवरण में बदलाव किए जाने की भी जांच की जा रही है। इससे ग्राहकों को अनधिकृत निकासी की जानकारी समय पर नहीं मिल सकी। इसके अलावा, कुछ FD में कथित तौर पर अन्य लोगों को संयुक्त खाताधारक बनाया गया और जमा राशि को समय से पहले बंद कराकर दूसरी जगह ट्रांसफर किया गया।
पासबुक अपडेट कराने पहुंची महिला से खुला मामला
यह मामला 16 सितंबर को तब सामने आया, जब संगीता नाम की एक खाताधारक अपनी पासबुक अपडेट कराने बैंक पहुंचीं। उन्होंने खाते में तीन ऐसे लेनदेन देखे, जिनकी अनुमति उन्होंने नहीं दी थी। शिकायत बैंक प्रबंधन तक पहुंची तो संबंधित रिकॉर्ड और लेनदेन की जांच शुरू हुई। बैंक को इन ट्रांजेक्शन से जुड़े जरूरी वाउचर भी नहीं मिले। इसके बाद आंतरिक जांच में कई खातों में संदिग्ध गतिविधियां सामने आईं।
एक करोड़ रुपये से अधिक की मुआवजा राशि भी प्रभावित होने का दावा
इस मामले में नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे की रकम जमा कराने वाले खाताधारकों की चिंता भी बढ़ गई है। कुछ प्रभावित लोगों ने दावा किया है कि उनके खातों से बड़ी रकम गायब हुई है। एक खाताधारक के परिवार के मुताबिक, जमीन अधिग्रहण के मुआवजे के रूप में मिले 1.29 करोड़ रुपये में से 15 लाख रुपये निकालने के बाद शेष राशि बैंक में जमा थी, लेकिन उसमें से करीब एक करोड़ रुपये का पता नहीं चल रहा है। ऐसे कई दावों की स्वतंत्र पुष्टि और वास्तविक नुकसान का आकलन जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
CBI ने दर्ज किया मामला, जांच जारी
PNB की शिकायत के आधार पर CBI ने 29 अक्टूबर को मामला दर्ज किया था। इसके बाद 3 नवंबर को दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। एजेंसी बैंक के डिजिटल रिकॉर्ड, लेनदेन और कथित लाभार्थी खातों की जांच कर रही है। मामले में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, विश्वासघात और रिकॉर्ड में हेराफेरी से संबंधित आरोप लगाए गए हैं। बैंक ने बताया है कि उसने तीन खाताधारकों के करीब 43 लाख रुपये के दावों का भुगतान किया है और वास्तविक दावों के निपटारे का आश्वासन दिया है।
इस घटना ने बैंकिंग व्यवस्था में आंतरिक निगरानी और खाताधारकों की जमा पूंजी की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस कथित हेराफेरी में कितने लोग प्रभावित हुए, कुल कितनी रकम का लेनदेन हुआ और बैंक के भीतर किन स्तरों पर लापरवाही या मिलीभगत रही।
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