सोशल मीडिया के साबुन से नहीं धुलेंगे आरोपों के दाग, महाराज को खुद देना होगा जवाब; रसूखदारों के साथ तस्वीरें और समाजसेवा का प्रचार आरोपों का जवाब नहीं, पुलिस जांच में सहयोग ही सबसे बेहतर रास्ता!
गोपाल चतुर्वेदी
मथुरा। पिछले दो दिनों से सोशल मीडिया पर कथावाचक इंद्रदेव महाराज के समर्थन में अचानक एक अलग ही मुहिम दिखाई देने लगी है। कोई उनके सामाजिक कार्यों का बखान कर रहा है तो कोई उन्हें संस्कारों से परिपूर्ण महान व्यक्तित्व और समाज सुधारक के रूप में प्रस्तुत करने में जुटा है। महाराज के व्यक्तित्व और कार्यों का प्रचार करना समर्थकों का अधिकार हो सकता है, लेकिन एक गंभीर प्रकरण से जुड़े सवालों का जवाब महिमामंडन से नहीं दिया जा सकता।
सवाल यह नहीं है कि महाराज ने अब तक समाज के लिए क्या किया, सवाल यह है कि उनके संबंध में सामने आए गंभीर आरोपों पर उनका पक्ष क्या है? सोशल मीडिया पर उनके समर्थन में जिस तरह साबुन और सर्फ लेकर आरोपों के दाग धोने की कोशिश हो रही है, उससे कहीं बेहतर होता कि महाराज स्वयं सामने आकर अपना पक्ष रखते और जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग करते।
आखिर महाराज को अपने बचाव में ऐसी प्रचार फौज की जरूरत क्यों पड़ रही है? रसूखदार लोगों के साथ तस्वीरें साझा कर उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा और प्रभावशाली संपर्कों को प्रदर्शित करने से किसी मामले की सच्चाई नहीं बदलती। न ही इससे शिकायतकर्ता के मन में उठ रहे सवाल खत्म होते हैं। ऐसे प्रयासों से अनजाने में शिकायतकर्ता पर सामाजिक दबाव पड़ने की आशंका भी पैदा हो सकती है।
यह भी समझना होगा कि सोशल मीडिया की अदालत में किसी को दोषी ठहरा देना न्याय नहीं है और समर्थकों की अदालत में किसी को महान घोषित कर देना भी आरोपों का जवाब नहीं है। आसाराम प्रकरण से सबक यही है कि किसी व्यक्ति के प्रति अंधभक्ति न्यायिक प्रक्रिया से ऊपर नहीं हो सकती। भक्तों की आस्था अपनी जगह है, लेकिन अदालत का फैसला तथ्यों और कानून के आधार पर होता है।
इंद्रदेव महाराज के समर्थकों को चाहिए कि वे सोशल मीडिया पर महिमामंडन की मुहिम चलाने के बजाय महाराज से उन सवालों के स्पष्ट जवाब मांगें, जो इस प्रकरण के सामने आने के बाद उठ रहे हैं। महाराज को भी सामने आकर अपना पक्ष रखना चाहिए और पुलिस की जांच में नियमानुसार पूरा सहयोग करना चाहिए।
क्योंकि चरित्र पर लगे आरोपों का जवाब तस्वीरों, प्रभावशाली परिचितों और प्रचार से नहीं मिलता। सच सामने लाने का रास्ता कानून और निष्पक्ष जांच से होकर ही गुजरता है। आरोपों का दाग सच है या महज एक आरोप, इसका फैसला सोशल मीडिया नहीं, कानून करेगा। यही महाराज के हित में है, उनके अनुयायियों की आस्था के हित में है और सनातन समाज की प्रतिष्ठा के हित में भी।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)