जम्मू में 111 सिम कार्ड और 60 से अधिक फर्जी बैंक खातों से 70 करोड़ का लेनदेन, दुबई कनेक्शन की जांच में जुटी पुलिस
जम्मू। जम्मू पुलिस की जांच में 111 मोबाइल सिम कार्ड से जुड़े एक बड़े वित्तीय नेटवर्क का खुलासा हुआ है। जांच के दौरान जाली दस्तावेजों के आधार पर खोले गए 60 से अधिक बैंक खातों के जरिए 70 करोड़ रुपये से ज्यादा के संदिग्ध लेनदेन का पता चला है। इस नेटवर्क के तार दुबई, बांग्लादेश और पाकिस्तान से जुड़ने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस अब विदेश में बैठे कथित सरगना और नेटवर्क के वित्तीय लेनदेन की गहराई से जांच कर रही है।
मामले की शुरुआत 1 अगस्त को हुई थी, जब जम्मू सिटी पुलिस ने विवेकानंद चौक के पास एक कार में सवार दो लोगों से 111 मोबाइल सिम कार्ड बरामद किए थे। शुरुआती पूछताछ के बाद पुलिस ने इन सिम कार्डों के इस्तेमाल और उनसे जुड़े लोगों की जांच शुरू की। आगे की पड़ताल में ऑनलाइन गेमिंग, सट्टेबाजी और हवाला से जुड़े संदिग्ध लेनदेन की जानकारी सामने आई।
जांच में मुख्य आरोपी आकाश आनंद का नाम सामने आया है। पुलिस के अनुसार, वह जम्मू-कश्मीर में इस नेटवर्क का संचालन संभालता था, जबकि इसका कथित मास्टरमाइंड दुबई में बैठकर गतिविधियों को नियंत्रित कर रहा था। आकाश आनंद के विदेश में होने की बात सामने आने के बाद पुलिस उसका पासपोर्ट रद्द कराने की प्रक्रिया में जुटी है। उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया गया है।
पुलिस जांच के मुताबिक, फर्जी दस्तावेजों के जरिए खोले गए बैंक खातों का इस्तेमाल रकम को अलग-अलग खातों में स्थानांतरित करने के लिए किया जाता था। कुछ खातों में एक दिन में 300 तक लेनदेन दर्ज होने की जानकारी मिली है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन खातों के जरिए भेजी गई रकम का वास्तविक स्रोत और अंतिम लाभार्थी कौन थे।
इस मामले में 16 अक्टूबर को साइबर कैफे संचालक अभिनव कुमार और संजय कुमार को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने उनके ठिकाने से कंप्यूटर, प्रिंटर और अन्य उपकरण जब्त किए। आशंका है कि इन उपकरणों के माध्यम से जाली दस्तावेज तैयार कर बैंक खाते खुलवाने में मदद की जाती थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जम्मू जोन के आईजीपी की निगरानी में विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया है। पुलिस अब नेटवर्क के विदेशी संपर्कों, हवाला के जरिए हुए संभावित लेनदेन और आतंकी गतिविधियों की फंडिंग से जुड़े संभावित पहलुओं की जांच कर रही है। हालांकि, आतंकी फंडिंग से संबंध अभी जांच का विषय है और इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
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