बिहार में प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल, मधुबनी और मुजफ्फरपुर की घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
पटना। बिहार में पिछले दो दिनों के भीतर हुई दो घटनाओं ने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, विभागों के बीच समन्वय और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मधुबनी में एक पुलिस अधिकारी की कथित फायरिंग में एक व्यक्ति की मौत और तीन लोगों के घायल होने के बाद जिलाधिकारी को आक्रोशित लोगों के बीच विरोध का सामना करना पड़ा। वहीं, मुजफ्फरपुर में सड़क किनारे नाला निर्माण के दौरान PNG गैस पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने से हुए विस्फोट में एक व्यक्ति की मौत और कई लोग घायल हो गए। दोनों घटनाओं ने प्रशासनिक जवाबदेही और सुरक्षा व्यवस्था पर बहस तेज कर दी है।
मधुबनी की घटना में पुलिस अधिकारी पर हत्या का मुकदमा
मधुबनी जिले के बलिराजगढ़ गांव में मंगलवार को उस समय गंभीर स्थिति पैदा हो गई, जब ड्यूटी पर तैनात सहायक अवर निरीक्षक (ASI) चंद्रमोहन सिंह की कथित फायरिंग में 50 वर्षीय अशोक यादव की मौत हो गई और तीन अन्य लोग घायल हो गए। पुलिस के मुताबिक, अधिकारी एक महिला के घर में मौजूद था। ग्रामीणों के वहां पहुंचने पर उसने कथित तौर पर अपनी सर्विस पिस्टल से गोलीबारी की और मौके से फरार हो गया।
घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। जिलाधिकारी आनंद शर्मा और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक योगेंद्र कुमार लोगों से बातचीत करने मौके पर पहुंचे। इसी दौरान एक महिला ने विरोध जताते हुए जिलाधिकारी का कॉलर पकड़ लिया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों की सुरक्षा और आम लोगों के बीच बढ़ते असंतोष को लेकर चर्चा शुरू हो गई।
पुलिस ने आरोपी ASI को निलंबित कर उसके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है। गिरफ्तारी के लिए पांच विशेष टीमें गठित की गई हैं और सूचना देने वाले के लिए 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। प्रशासन ने पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने और मामले में त्वरित कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
मुजफ्फरपुर में पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने से विस्फोट
दूसरी घटना मुजफ्फरपुर के गोबरसही-डुमरी इलाके की है। सोमवार को सड़क किनारे नाला निर्माण के लिए की जा रही खुदाई के दौरान जमीन के नीचे बिछी PNG गैस पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई। इससे गैस का रिसाव हुआ और बाद में विस्फोट तथा आग लगने की घटना हुई। हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए। विस्फोट से आसपास के मकानों और वाहनों को भी नुकसान पहुंचा।
घटना के बाद जिला प्रशासन और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य कराया। मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि खुदाई के दौरान पाइपलाइन की सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन हुआ था या नहीं और हादसे के लिए किन विभागों, अधिकारियों अथवा निर्माण एजेंसी की जिम्मेदारी बनती है।
दो घटनाओं ने प्रशासनिक समन्वय पर उठाए सवाल
मधुबनी और मुजफ्फरपुर की घटनाएं अलग-अलग परिस्थितियों में हुई हैं, लेकिन दोनों में प्रशासनिक जवाबदेही का सवाल प्रमुखता से सामने आया है। मधुबनी में पुलिसकर्मी पर गंभीर आपराधिक आरोप लगना और उसके बाद ग्रामीणों का आक्रोश, जबकि मुजफ्फरपुर में निर्माण कार्य के दौरान गैस पाइपलाइन की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पाना, संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली की जांच की जरूरत बताता है।
हालांकि, इन दो घटनाओं के आधार पर पूरे बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त या अराजक घोषित करना जल्दबाजी होगी। लेकिन यह जरूर जरूरी है कि जांच निष्पक्ष और समयबद्ध हो, दोषियों की जवाबदेही तय की जाए तथा निर्माण कार्यों से पहले संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित किया जाए। प्रशासन की विश्वसनीयता केवल घटनास्थल पर अधिकारियों की मौजूदगी से नहीं, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने और पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाने से बनती है।
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