‘बड़ी मछलियों पर कार्रवाई क्यों नहीं?’ राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में कांग्रेस का हमला, जयराम रमेश ने उठाए जांच पर सवाल
नई दिल्ली। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश सरकार की जांच पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मंगलवार को आरोप लगाया कि जांच में आठ लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर मामले को पूरा मान लिया गया, जबकि मंदिर ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों की प्रशासनिक जिम्मेदारी और भूमिका की स्वतंत्र जांच नहीं हुई। उन्होंने पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर कहा कि चढ़ावे की चोरी के मामले में केवल आठ आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल करना पूरे प्रकरण की जांच पूरी होने का प्रमाण नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि मंदिर में चढ़ावे की सुरक्षा, गिनती, लेखा-जोखा और निगरानी की जिम्मेदारी संभालने वाले वरिष्ठ पदाधिकारियों की जवाबदेही क्यों तय नहीं की गई। उन्होंने ट्रस्ट के पदाधिकारी चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव का नाम लेते हुए कहा कि उन्हें आरोपी के बजाय गवाह बनाया गया है। कांग्रेस नेता ने उनकी प्रशासनिक भूमिका की स्वतंत्र जांच की मांग की।
रमेश ने दावा किया कि मंदिर परिसर में सीसीटीवी के जरिए 105 चोरी की घटनाएं दर्ज हुई थीं और करीब 79.85 लाख रुपये की बरामदगी हुई थी। उन्होंने सवाल किया कि इन घटनाओं में कुल कितनी राशि चोरी हुई और बाकी रकम का क्या हुआ। उन्होंने ट्रस्ट की स्थापना से अब तक चढ़ावे, नकदी, बैंक खातों, सोना-चांदी, संपत्तियों और निर्माण खर्च का व्यापक फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग भी की।
कांग्रेस नेता ने प्राथमिकी दर्ज कराने में हुई कथित देरी पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, 4 जून को नकदी प्राप्त होने से जुड़ा वीडियो तत्कालीन महासचिव चंपत राय तक पहुंचा था और अगले दिन उन्हें सीसीटीवी फुटेज भी दिखाई गई थी, लेकिन प्राथमिकी 25 जून को दर्ज हुई। उन्होंने पूछा कि शिकायत दर्ज कराने में 21 दिन का समय क्यों लगा और इस दौरान क्या कार्रवाई की गई।
यह विवाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2 नवंबर को मामले से जुड़ी स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिकाओं का निपटारा किए जाने के बाद सामने आया है। अदालत ने एसआईटी की ओर से आठ आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किए जाने पर संज्ञान लेते हुए निचली अदालत को कानून के अनुसार मुकदमे की कार्यवाही आगे बढ़ाने का निर्देश दिया। साथ ही याचिकाकर्ताओं को सुनवाई के दौरान मजिस्ट्रेट अदालत की सहायता करने की अनुमति दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसने मामले के आरोपों के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी को आगे की जांच जारी रखने की भी अनुमति दी है।
जयराम रमेश ने अदालत के इस आदेश को किसी भी पक्ष को क्लीन चिट दिए जाने के रूप में पेश करने पर आपत्ति जताई। कांग्रेस की मांग है कि मामले में सभी स्तरों पर प्रशासनिक और वित्तीय जवाबदेही तय की जाए तथा जिन लोगों की भूमिका जांच में सामने आए, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई हो।
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