नेहा बोरा के बयान पर सियासी विवाद, ‘ब्राह्मणवादी व्यवस्था’ की टिप्पणी को लेकर NDA नेताओं ने घेरा; राहुल गांधी से भी पूछे सवाल
नई दिल्ली। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा की ‘ब्राह्मणवादी व्यवस्था’ और धार्मिक संस्थानों को लेकर की गई टिप्पणी पर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना के नेताओं ने उनके बयान की आलोचना करते हुए इसे सनातन धर्म और उसके अनुयायियों को निशाना बनाने वाला बताया। भाजपा नेताओं ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से भी सवाल किया कि उन्होंने नेहा बोरा को अपने राजनीतिक मंच पर जगह क्यों दी।
विवाद मंगलवार को नेहा बोरा का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद तेज हुआ। इसमें वह महिलाओं और समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा के संदर्भ में ‘ब्राह्मणवादी व्यवस्था’ की आलोचना करती दिखाई दे रही हैं। उन्होंने मंदिरों के भीतर पुजारियों द्वारा दुष्कर्म की घटनाओं का भी उल्लेख किया और उन्नाव तथा कठुआ जैसे मामलों का संदर्भ दिया।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने वीडियो साझा कर नेहा बोरा पर हिंदू धर्म के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया। उन्होंने उनके विचारों को राहुल गांधी से जोड़ते हुए कांग्रेस की विचारधारा पर भी सवाल उठाए। भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि किसी धर्म और उसके अनुयायियों को निशाना बनाना उचित नहीं है। वहीं, पार्टी प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान ने बोरा के राजनीतिक रुख और राहुल गांधी की ओर से उन्हें मंच दिए जाने पर सवाल उठाए।
शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी और समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने भी पुजारियों तथा धार्मिक संस्थानों को लेकर की गई व्यापक टिप्पणी पर आपत्ति जताई। शिवसेना नेता आनंद दुबे ने भी बयान की आलोचना की। बिहार के मंत्री संतोष सुमन ने भी नेहा बोरा की टिप्पणियों पर सवाल उठाए।
यह विवाद उस समय सामने आया है, जब नेहा बोरा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की ओर से लाए गए महाभियोग प्रस्ताव का समर्थन कर रही थीं। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर भी सवाल उठाए थे। इसी दौरान उन्होंने जातिगत भेदभाव और महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर ‘ब्राह्मणवादी व्यवस्था’ की आलोचना की थी।
इस बीच, एक सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता ने नेहा बोरा के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज कराने का दावा किया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उनकी टिप्पणियों से सांप्रदायिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है। हालांकि, शिकायत के आधार पर किसी प्राथमिकी या पुलिस कार्रवाई की पुष्टि सामने नहीं आई है।
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