केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य में हेलीकॉप्टरों के शोर का असर, वन्यजीव प्रभाग फिर करेगा अध्ययन
उत्तराखंड के केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र में हेलीकॉप्टर सेवाओं से होने वाले शोर को लेकर एक बार फिर वन्यजीवों पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन किया जाएगा। वन्यजीव प्रभाग इस अध्ययन के जरिए यह जानने का प्रयास करेगा कि हेलीकॉप्टरों की लगातार आवाजाही से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और उनके व्यवहार पर कितना असर पड़ रहा है।
इससे पहले वर्ष 2017 में भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) और उत्तराखंड वन विभाग ने इस संबंध में अध्ययन किया था। उस अध्ययन में सामने आया था कि क्षेत्र में मानवीय गतिविधियों के संयुक्त प्रभाव के चलते कुछ वन्यजीवों ने अपनी सक्रियता का समय बदलकर सुबह-शाम या रात कर लिया था। हालांकि, हेलीकॉप्टरों के शोर और अन्य मानवीय गतिविधियों के प्रभावों को अलग-अलग करके देखना मुश्किल बताया गया था।
2017 के अध्ययन में हेलीकॉप्टरों की उड़ान की ऊंचाई और शोर के स्तर के बीच संबंध भी पाया गया था। रिपोर्ट में उड़ान की न्यूनतम ऊंचाई तय करने, हेलीकॉप्टर संचालन की निगरानी करने और वन्यजीवों पर पड़ने वाले प्रभावों का नियमित अंतराल पर अध्ययन करने की सिफारिश की गई थी। अब प्रस्तावित नए अध्ययन से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि मौजूदा परिस्थितियों में वन्यजीवों पर क्या प्रभाव पड़ रहा है और उनके संरक्षण के लिए किन उपायों की जरूरत है।
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