बारिश के चलते टला विपक्ष का ‘जन महाभियोग’, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ क्यों जुटा इंडिया गठबंधन?
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडिया गठबंधन का प्रस्तावित प्रतीकात्मक ‘जन महाभियोग’ कार्यक्रम बारिश के कारण टाल दिया गया है। यह आयोजन शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर होना था, लेकिन अब इसे शनिवार के लिए निर्धारित किया गया है। विपक्षी दलों का कहना है कि इस कार्यक्रम के जरिए चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और कथित वोट चोरी से जुड़े मुद्दों को सार्वजनिक मंच पर उठाया जाएगा।
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार को करनी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे प्रतीकात्मक प्रस्ताव पेश करेंगे, जबकि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समापन संबोधन देंगे। आयोजन में इंडिया गठबंधन के घटक दलों के प्रतिनिधियों के अलावा सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों और एसआईआर प्रक्रिया से प्रभावित होने का दावा करने वाले मतदाताओं को भी अपनी बात रखने का अवसर दिया जाएगा। करीब 30 वक्ताओं के शामिल होने की संभावना जताई गई है।
विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान कई जगह मतदाताओं के नाम हटाने और सूची में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं। उनका दावा है कि चुनाव आयोग इन शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं कर रहा है। इसी आधार पर गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त से जवाबदेही तय करने और उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है। कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
दरअसल, विपक्ष पहले इस कार्यक्रम को अशोक होटल और रामलीला मैदान में आयोजित करना चाहता था, लेकिन वहां अनुमति नहीं मिलने के बाद इसे खरगे के आवास पर आयोजित करने का फैसला लिया गया। गुरुवार को इंडिया गठबंधन के नेताओं ने खरगे के आवास पर बैठक कर कार्यक्रम की रूपरेखा तय की थी। इस बैठक में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, झारखंड मुक्ति मोर्चा और वाम दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
यह प्रतीकात्मक जन महाभियोग कोई संवैधानिक या संसदीय महाभियोग की प्रक्रिया नहीं है। मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए संविधान में निर्धारित संसदीय प्रक्रिया का पालन करना होता है। विपक्ष का यह आयोजन मुख्य रूप से चुनाव आयोग के खिलाफ अपने आरोपों को सार्वजनिक रूप से उठाने और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश है। यह कार्यक्रम एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित विपक्ष की रैली से पहले गठबंधन की एकजुटता दिखाने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)