सीआरपीएफ का 47 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा, 12 महीने तक ऑपरेशन में नहीं गई किसी जवान की जान; पीएम मोदी बोले- ‘एक शून्य जो बहुत कुछ कहता है’
नई दिल्ली। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने अपने इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। बल ने लगातार 12 महीने ऐसे पूरे किए हैं, जिनमें किसी भी जवान या अधिकारी की ऑपरेशन के दौरान मौत नहीं हुई। 47 साल बाद दोहराई गई इस उपलब्धि की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सराहना की। उन्होंने सोशल मीडिया पर सीआरपीएफ के रिकॉर्ड को साझा करते हुए लिखा, ‘एक ऐसा शून्य जो बहुत कुछ कहता है।’
सीआरपीएफ के महानिदेशक जीपी सिंह के मुताबिक, बल में आखिरी ऑपरेशनल मौत 30 अक्टूबर 2025 को हुई थी। इसके बाद 30 अक्टूबर 2026 तक लगातार एक साल किसी भी ऑपरेशन में जवान या अधिकारी की जान नहीं गई। इससे पहले ऐसा रिकॉर्ड जनवरी 1979 में समाप्त हुई अवधि के दौरान दर्ज किया गया था। यह उपलब्धि ऐसे समय में हासिल हुई है, जब सीआरपीएफ जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों सहित प्रमुख सुरक्षा मोर्चों पर तैनात है।
सीआरपीएफ प्रमुख ने इस सफलता के पीछे आधुनिक उपकरणों, बेहतर प्रशिक्षण, रणनीतिक योजना और अभियान के दौरान घायल जवानों को तेजी से बेहतर चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंचाने की व्यवस्था को अहम बताया। अधिकारियों के अनुसार, हेलीकॉप्टर और एयर एम्बुलेंस के जरिए समय पर इलाज उपलब्ध कराने से भी जवानों की जान बचाने में मदद मिली है।
इस उपलब्धि के पीछे उन जवानों और अधिकारियों के बलिदान की याद भी जुड़ी है, जिन्होंने देश की आंतरिक सुरक्षा के अभियानों में अपनी जान गंवाई। सीआरपीएफ के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अब तक बल के 2,270 जवान और अधिकारी ड्यूटी के दौरान शहीद हो चुके हैं। प्रधानमंत्री की पोस्ट में ‘शून्य’ का संदेश इसी लंबे संघर्ष, बलिदान और सुरक्षा अभियानों के बीच हासिल हुई उपलब्धि को रेखांकित करता है।
करीब 3.25 लाख कर्मियों वाला सीआरपीएफ देश का प्रमुख आंतरिक सुरक्षा बल है। इसकी जिम्मेदारियों में नक्सल विरोधी अभियान, जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी ड्यूटी और पूर्वोत्तर राज्यों में उग्रवाद विरोधी अभियान शामिल हैं।
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