CBSE ने 12वीं की कॉपियों की दोबारा जांच से जुटाए 16.47 करोड़ रुपये, अंक बढ़ने पर 3.57 करोड़ लौटाए; कई छात्रों को अब भी रिफंड का इंतजार
नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 2026 की कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के नतीजे घोषित होने के बाद उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी, अंकों के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया से छात्रों से कुल 16.47 करोड़ रुपये (अनंतिम आंकड़ा) जुटाए। यह जानकारी सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिले जवाब में सामने आई है। हालांकि, बोर्ड ने यह नहीं बताया कि इन सेवाओं के लिए कुल कितने विद्यार्थियों ने आवेदन किया था।
14 अक्टूबर को दिए गए आरटीआई जवाब के मुताबिक, सीबीएसई को उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी उपलब्ध कराने से 11.37 करोड़ रुपये की आय हुई, जबकि अंकों के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन से संयुक्त रूप से 5.10 करोड़ रुपये मिले। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि वह अंकों के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन से प्राप्त राशि का अलग-अलग रिकॉर्ड नहीं रखता है।
**अंक बढ़ने पर 3.57 करोड़ रुपये लौटाए**
सीबीएसई के अनुसार, पुनर्मूल्यांकन के बाद जिन विद्यार्थियों के अंक बढ़े, उन्हें कुल 3.57 करोड़ रुपये वापस किए गए। यह कुल वसूली का लगभग 21.68 प्रतिशत है। हालांकि, बोर्ड ने यह जानकारी नहीं दी कि कितने विद्यार्थियों को रिफंड मिला। दूसरी ओर, कई छात्रों ने शिकायत की है कि पुनर्मूल्यांकन में अंक बढ़ने के बावजूद उन्हें फीस वापस नहीं मिली।
कुछ विद्यार्थियों ने पुनर्मूल्यांकन पोर्टल में तकनीकी समस्याओं की भी शिकायत की। एक छात्र ने बताया कि उसने पांच विषयों के 32 सवालों की दोबारा जांच के लिए आवेदन भरना शुरू किया था, लेकिन अंतिम समय में पोर्टल से लॉगआउट हो जाने के कारण वह प्रक्रिया पूरी नहीं कर सका।
**शुल्क में भी की गई थी कटौती**
सीबीएसई ने इस साल 17 मई को पुनर्मूल्यांकन से जुड़ी फीस में बड़ी कटौती की थी। उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी लेने का शुल्क 700 रुपये से घटाकर 100 रुपये प्रति विषय, अंकों के सत्यापन का शुल्क 500 रुपये से घटाकर 100 रुपये और प्रत्येक सवाल के पुनर्मूल्यांकन का शुल्क 100 रुपये से घटाकर 25 रुपये कर दिया गया था। बोर्ड ने यह भी घोषणा की थी कि पुनर्मूल्यांकन के बाद अंक बढ़ने पर संबंधित विद्यार्थी को पूरी फीस वापस की जाएगी।
**ऑनलाइन मूल्यांकन प्रक्रिया पर उठे सवाल**
इस साल सीबीएसई ने 17 फरवरी से 10 अप्रैल के बीच 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं आयोजित की थीं और 13 मई को परिणाम घोषित किए थे। इस बार ऑनलाइन स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली के तहत उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया गया। परिणामों के बाद मूल्यांकन प्रक्रिया में गड़बड़ियों और तकनीकी समस्याओं को लेकर विद्यार्थियों, अभिभावकों तथा स्कूलों की ओर से सवाल उठाए गए थे।
आरटीआई के जवाब में बोर्ड ने यह भी बताया कि उसकी वित्त शाखा को उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग के लिए संबंधित सेवा प्रदाता कंपनी को भुगतान करने का कोई स्वीकृति आदेश प्राप्त नहीं हुआ था। कंपनी पर लगाए गए जुर्माने की जानकारी भी वित्त विभाग के पास उपलब्ध नहीं थी। इन खुलासों के बाद मूल्यांकन व्यवस्था, फीस और रिफंड प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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