नागपुर में बिश्नोई गैंग के नाम पर आठ सर्राफा कारोबारियों से रंगदारी की मांग, महिला ने 10 रुपये लेकर थमाया धमकी भरा लिफाफा
नागपुर। महाराष्ट्र के नागपुर में लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर आठ सर्राफा कारोबारियों से 10-10 लाख रुपये की रंगदारी मांगने का मामला सामने आया है। इस घटना में एक महिला की भूमिका भी सामने आई है, जो एक ज्वेलरी दुकान पर पहुंची और डाक शुल्क के नाम पर 10 रुपये लेकर कारोबारी को लिफाफा थमा गई। लिफाफा खोलने पर उसमें रंगदारी मांगने वाले धमकी भरे पत्र मिले।
पुलिस के अनुसार, न्यू इतवारी रोड स्थित दुर्गा ज्वेलर्स के संचालक नेहल टिनखेडे को 31 अक्टूबर को एक महिला ने लिफाफा दिया था। महिला ने इसके लिए 10 रुपये मांगे और डाक शुल्क बताकर वहां से चली गई। बाद में कारोबारी ने लिफाफा खोला तो उसमें उसके नाम के साथ सात अन्य सर्राफा कारोबारियों के लिए भी अलग-अलग पत्र रखे हुए थे। प्रत्येक कारोबारी से 10 लाख रुपये देने की मांग की गई थी।
पत्रों में खुद को लॉरेंस बिश्नोई गैंग का मुंबई स्थित शूटर बताने वाले व्यक्ति ने तीन दिनों के भीतर रकम देने की चेतावनी दी थी। पैसे नहीं देने या पुलिस को सूचना देने पर कारोबारियों और उनके परिवारों को नुकसान पहुंचाने की धमकी भी दी गई थी। पत्र में रकम देने की सहमति का संकेत देने के लिए दुकानों के बाहर एक विशेष पोस्टर लगाने का निर्देश भी दिया गया था।
मामले में तहसील पुलिस स्टेशन में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ रंगदारी मांगने और आपराधिक धमकी देने का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस महिला की पहचान करने के साथ ही पत्र भेजने वाले व्यक्ति का पता लगाने में जुटी है। जांच में सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों और डाक विभाग से मिली जानकारी की मदद ली जा रही है। शुरुआती जांच में पत्रों का संबंध नागपुर के खामला इलाके के एक पोस्ट बॉक्स से जुड़ता दिखाई दिया है।
पुलिस इस आशंका की भी जांच कर रही है कि स्थानीय अपराधी बिश्नोई गैंग के नाम का इस्तेमाल कर कारोबारियों को डराने की कोशिश कर रहे हों। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि रंगदारी मांगने वालों का वास्तव में गैंग से कोई संबंध है या नहीं। सर्राफा बाजार में कारोबारियों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं और सादे कपड़ों में भी निगरानी की जा रही है।
महिला की भूमिका सामने आने के बाद गैंग में महिलाओं की भर्ती को लेकर सवाल उठे हैं, लेकिन नागपुर के इस मामले से किसी संगठित भर्ती की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस अभी महिला और अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।
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