SIR पर संसद में चर्चा को लेकर सियासी घमासान: अमित शाह के पुराने बयान पर राहुल गांधी ने उठाए सवाल, सड़क से सदन तक आर-पार की लड़ाई
देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। इसी मुद्दे पर विपक्ष ने संसद में चर्चा कराने, चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण लेने और सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग उठाई थी। हालांकि, दिसंबर 2025 में संसद में चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि SIR पर सदन में चर्चा नहीं हो सकती, क्योंकि यह चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र का विषय है और आयोग एक स्वतंत्र संस्था है।
अब इस मुद्दे पर अमित शाह के बदले हुए रुख को लेकर कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सवाल खड़े किए हैं। 5 नवंबर को हरियाणा के करनाल में एक कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने राहुल गांधी को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उन्हें SIR पर चर्चा करनी है तो संसद में आएं। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष की मांग पर सरकार इस विषय पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने को तैयार है। इसके अगले दिन राहुल गांधी ने अमित शाह के पुराने और नए बयानों का वीडियो साझा करते हुए कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भ्रमित न करें, बल्कि उन्हें राहुल गांधी के साथ खुली बहस के लिए राजी करें। राहुल ने बहस के लिए किसी भी मंच और समय पर तैयार होने की बात कही।
विपक्ष का सवाल है कि जब पहले संसद में SIR पर चर्चा से इनकार किया गया था, तो अब उसी मुद्दे पर विशेष सत्र बुलाने की पेशकश क्यों की जा रही है? विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची से जुड़े सवालों का जवाब चुनाव आयोग और सरकार को सार्वजनिक रूप से देना चाहिए। इसी विवाद के बीच जंतर-मंतर और रामलीला मैदान सहित अलग-अलग स्थानों पर SIR के विरोध में प्रदर्शन भी हुए हैं। विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है।
विवाद उस समय और गहरा गया जब अमित शाह ने दावा किया कि SIR के दौरान हटाए गए नामों में करीब तीन करोड़ बांग्लादेशी घुसपैठियों के थे। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में करीब 1.27 करोड़ हिंदू मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में नहीं होने का दावा किया। इन अलग-अलग बयानों को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाया है कि आखिर हटाए गए या सूची में नहीं मिले मतदाताओं की वास्तविक स्थिति क्या है और इन आंकड़ों का आधार क्या है?
हालांकि, चुनाव आयोग के आंकड़ों और राजनीतिक बयानों के बीच अंतर समझना भी जरूरी है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि करीब 13 करोड़ मतदाताओं का आंकड़ा प्रारंभिक स्तर पर अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और दोहरी प्रविष्टियों वाली श्रेणियों में रखे गए मतदाताओं से जुड़ा है। इसे सीधे तौर पर 13 करोड़ नामों के अंतिम रूप से हटाए जाने के बराबर नहीं माना जा सकता। वहीं, अमित शाह और योगी आदित्यनाथ के दावों को लेकर विपक्ष लगातार स्पष्टीकरण मांग रहा है।
विपक्ष का कहना है कि SIR के मुद्दे पर वह संसद और सड़कों, दोनों जगह अपनी लड़ाई जारी रखेगा। उसका तर्क है कि मतदाता सूची से किसी भी पात्र नागरिक का नाम हटना लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है। राजनीतिक बयानबाजी के बीच अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार और चुनाव आयोग इन सवालों का क्या जवाब देते हैं और क्या SIR पर संसद में औपचारिक चर्चा हो पाती है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)