युद्ध की आशंका के बीच अमेरिकी सैन्य विमानों की आवाजाही और शेयर बाजार में गिरावट, लेकिन अगले 2-3 दिन में बड़े युद्ध के दावे की पुष्टि नहीं
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच सोशल मीडिया पर अगले दो-तीन दिनों में बड़े युद्ध की शुरुआत होने की आशंका जताई जा रही है। इन दावों के समर्थन में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में अमेरिकी सी-17 ग्लोबमास्टर विमानों की लैंडिंग, यूरोपीय देशों की आपातकालीन तैयारियों और अमेरिकी शेयर बाजार में भारी गिरावट का हवाला दिया जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों और आधिकारिक सूचनाओं से निकट भविष्य में किसी बड़े वैश्विक युद्ध की शुरुआत होने की पुष्टि नहीं होती।
फ्लाइट ट्रैकिंग से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, नवंबर की शुरुआत में अमेरिकी सैन्य परिवहन विमान यूरोप और मध्य पूर्व की ओर जाते दिखाई दिए। कुछ रिपोर्टों में यूएई में भी अमेरिकी सी-17 विमानों के पहुंचने का उल्लेख है। ये विमान सैनिकों, सैन्य उपकरणों और जरूरी सामान के परिवहन में इस्तेमाल होते हैं। ऐसे विमानों की आवाजाही क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों का संकेत जरूर हो सकती है, लेकिन केवल इनके पहुंचने से किसी निश्चित सैन्य हमले या युद्ध की तारीख का अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
यूरोपीय देशों में नागरिकों को तीन महीने का जरूरी सामान जमा करने की सलाह दिए जाने का दावा भी सामने आया है। हालांकि, यूरोपीय संघ की तैयारियों संबंधी दिशा-निर्देशों में घरों को कम से कम 72 घंटे यानी तीन दिन तक जरूरी सेवाओं में बाधा आने की स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने की बात कही गई है। अलग-अलग देशों में यह अवधि अलग हो सकती है। इन तैयारियों का संबंध प्राकृतिक आपदाओं, बिजली-पानी की आपूर्ति बाधित होने, साइबर हमलों और अन्य आपात स्थितियों से भी है। इसलिए इसे किसी आसन्न युद्ध की आधिकारिक चेतावनी मानना उचित नहीं है।
अमेरिकी शेयर बाजार में 5 नवंबर को बड़ी गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान शुरुआती एक घंटे में दो ट्रिलियन डॉलर से अधिक के बाजार मूल्य में कमी आने की खबरें आईं। नैस्डैक और एसएंडपी 500 में भी तेज गिरावट हुई। हालांकि, बाजार में इस गिरावट के पीछे मुख्य रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) कंपनियों के शेयरों में बिकवाली, तकनीकी कंपनियों के मूल्यांकन को लेकर चिंताएं और अमेरिकी राजनीतिक घटनाक्रम से जुड़ी अनिश्चितता बताई गई। इसे सीधे युद्ध की आशंका से जोड़ने का कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है।
पोस्ट में समुद्र के भीतर बिछी इंटरनेट केबल को नुकसान पहुंचने की आशंका भी जताई गई है। समुद्र के नीचे मौजूद फाइबर ऑप्टिक केबल दुनिया के देशों के बीच इंटरनेट और डेटा संचार का महत्वपूर्ण आधार हैं। इन्हें नुकसान पहुंचने पर कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट की गति, अंतरराष्ट्रीय संचार, बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि, ऐसी स्थिति में पूरे विश्व का इंटरनेट एक साथ बंद हो जाएगा, यह कहना सही नहीं होगा। अलग-अलग मार्गों और वैकल्पिक नेटवर्क के जरिए कई सेवाएं जारी रह सकती हैं।
एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को लेकर भी पोस्ट में दावा किया गया है कि इंटरनेट केबल बाधित होने पर यही सेवा काम कर पाएगी। सैटेलाइट इंटरनेट कुछ परिस्थितियों में वैकल्पिक कनेक्टिविटी उपलब्ध करा सकता है, लेकिन इसे हर स्थिति में पूरी तरह सुरक्षित विकल्प नहीं माना जा सकता। भारत में स्टारलिंक को आवश्यक लाइसेंस मिल चुका है, लेकिन नवंबर 2026 तक इसकी व्यावसायिक सेवा शुरू करने के लिए सुरक्षा संबंधी मंजूरी और स्पेक्ट्रम आवंटन जैसी प्रक्रियाएं पूरी होना बाकी हैं।
मध्य पूर्व में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव पहले से बना हुआ है। हालिया घटनाक्रम में सैन्य कार्रवाई और कूटनीतिक बातचीत दोनों जारी रहने की खबरें सामने आई हैं। ऐसे में क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन अगले दो-तीन दिनों में भीषण युद्ध शुरू होने, इंटरनेट केबल काटे जाने या पूरी दुनिया के प्रभावित होने जैसे दावों को फिलहाल पुष्ट तथ्य के रूप में पेश नहीं किया जा सकता। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की राजनीतिक मंशा को लेकर किए गए दावे भी राजनीतिक आरोप और अटकलें हैं, स्थापित तथ्य नहीं।
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