मंगोलपुरी अग्निकांड: चार मजदूरों की मौत, परिवार की जिम्मेदारियों के लिए कर रहे थे ओवरटाइम
दिल्ली के मंगोलपुरी औद्योगिक क्षेत्र स्थित जूता फैक्टरी में शुक्रवार रात लगी आग ने चार परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया। हादसे में जान गंवाने वाले सभी कर्मचारी अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय तक काम कर रहे थे। किसी को बच्चों की पढ़ाई और बेहतर भविष्य की चिंता थी, तो कोई पत्नी के इलाज के लिए अधिक पैसे जुटाने की कोशिश कर रहा था।
उत्तर प्रदेश के हरदोई निवासी हरिहर पिछले करीब 25 वर्षों से मंगोलपुरी में रह रहे थे। वह पत्नी और तीन बच्चों के साथ रहते थे और लंबे समय से फैक्टरी में काम कर रहे थे। बच्चों की पढ़ाई और जरूरतों को पूरा करने के लिए वह अक्सर ओवरटाइम करते थे। वहीं, प्रेमचंद्र के परिवार में उनकी पत्नी कैंसर से पीड़ित हैं। बेटे के अनुसार, पत्नी के इलाज और घर का खर्च उठाने के लिए प्रेमचंद्र लगातार काम कर रहे थे। हादसे वाली रात भी वह अतिरिक्त शिफ्ट में थे।
बिहार के नालंदा निवासी अशोक कुमार की दो छोटी बेटियां हैं और उनकी पत्नी गर्भवती हैं। वह बच्चों को बेहतर शिक्षा और भविष्य देने के लिए दिल्ली में मेहनत कर रहे थे। हादसे के दौरान उन्होंने परिवार को फैक्टरी में आग लगने की जानकारी भी दी थी। चौथे मृतक लाल बाबू चौहान उत्तर प्रदेश के देवरिया के रहने वाले थे। वह करीब 15 वर्षों से फैक्टरी में काम कर रहे थे और परिवार में पत्नी तथा दो बेटे हैं।
हादसे के समय मृतकों के परिवार आने वाले त्योहारों की तैयारियों में जुटे थे, लेकिन आग की घटना ने उनकी खुशियां छीन लीं। चारों परिवारों के सामने अब आर्थिक और पारिवारिक जिम्मेदारियों को संभालने की चुनौती खड़ी हो गई है। घटना में दो अन्य मजदूर भी घायल हुए हैं और उनका उपचार जारी है।
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