चक्रवात 'मुरासु' का बढ़ा खतरा: 110 KM की रफ्तार से चलेंगी हवाएं, समुद्र में ऊंची लहरों की चेतावनी
बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती तूफान 'मुरासु' अब गंभीर चक्रवाती तूफान में तब्दील हो गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, इसके 2 नवंबर की आधी रात से 3 नवंबर की सुबह के बीच आंध्र प्रदेश के दक्षिणी तट पर नेल्लोर और नरसापुर के बीच ओंगोल के आसपास टकराने की आशंका है। इस दौरान हवा की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है, जबकि झोंके 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं।
तूफान के प्रभाव से आंध्र प्रदेश के तटीय और रायलसीमा क्षेत्रों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अनुमान है। मौसम विभाग ने सोमवार के लिए कृष्णा, गुंटूर, बापटला, प्रकाशम और नेल्लोर जिलों में अत्यधिक भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। मंगलवार के लिए भी कुछ जिलों में रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किए गए हैं। तेलंगाना और तमिलनाडु में भी भारी बारिश की चेतावनी दी गई है, जबकि ओडिशा के दक्षिणी जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका जताई गई है।
समुद्र में भी स्थिति खराब रहने का अनुमान है। आंध्र प्रदेश के दक्षिणी तट पर समुद्र की स्थिति बहुत खराब से अत्यधिक खराब हो सकती है। मौसम विभाग ने बापटला, कृष्णा और प्रकाशम जिलों के निचले तटीय इलाकों में ज्वार के सामान्य स्तर से करीब 1 से 1.5 मीटर ऊंची तूफानी लहरों के पहुंचने की आशंका जताई है। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।
तूफान से निपटने के लिए आंध्र प्रदेश सरकार ने राहत और बचाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। राज्य में छह एनडीआरएफ और सात एसडीआरएफ टीमों को तैनात किया गया है। नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं और संवेदनशील इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। ओडिशा प्रशासन ने भी दक्षिणी जिलों में सतर्कता बढ़ाते हुए संवेदनशील और बाढ़ या भूस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों पर निगरानी तेज कर दी है।
चक्रवात 'अर्नब' के प्रभाव से उबर रहे पूर्वी तटीय इलाकों के लिए मुरासु एक नई चुनौती बनकर आया है। प्रशासन ने लोगों से मौसम विभाग और स्थानीय अधिकारियों की चेतावनियों का पालन करने की अपील की है।
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