दिल्ली में रैली के चलते 80 फीसदी दुकानें बंद रहने का दावा, CTI ने 11 हजार करोड़ के नुकसान की बात कही
नई दिल्ली। रामलीला मैदान में रविवार को इंडिया गठबंधन की रैली का असर दिल्ली के व्यापारिक गतिविधियों पर भी पड़ा। व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने दावा किया है कि रैली और यातायात प्रतिबंधों के चलते राजधानी के करीब 80 प्रतिशत बाजारों की दुकानें बंद रहीं। संगठन के मुताबिक, इससे व्यापार को लगभग 11 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने बताया कि रामलीला मैदान के आसपास पांच किलोमीटर के दायरे में स्थित 20 से 22 प्रमुख बाजारों में करीब तीन लाख दुकानें हैं। बाजार संघों से मिली जानकारी के आधार पर अनुमान है कि इनमें से लगभग 2.5 लाख दुकानें बंद रहीं। जो दुकानें खुली थीं, वहां भी ग्राहकों की संख्या काफी कम रही। हालांकि, नुकसान और बंद दुकानों के ये आंकड़े संगठन के दावे पर आधारित हैं, इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
संगठन ने बताया कि रैली से पहले बड़ी संख्या में लोगों और वाहनों के दिल्ली पहुंचने की संभावना के कारण व्यापारियों और ग्राहकों के बीच यातायात व्यवस्था को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। इसका असर चांदनी चौक, सदर बाजार, खारी बावली, कश्मीरी गेट, दरियागंज, चावड़ी बाजार और कनॉट प्लेस जैसे प्रमुख व्यापारिक क्षेत्रों पर पड़ा।
CTI के अनुसार, रैली के कारण रामलीला मैदान के करीब 10 किलोमीटर के दायरे में माल ढुलाई भी प्रभावित हुई। दिल्ली के नरेला, बवाना, ओखला, मायापुरी, मुंडका और उद्योग नगर सहित 56 औद्योगिक क्षेत्रों से रोजाना लगभग पांच हजार ट्रक और टेंपो बाजारों तक सामान पहुंचाते हैं। संगठन का दावा है कि लोडिंग-अनलोडिंग और वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने से धनतेरस और दिवाली के लिए तैयार किया गया सामान गोदामों में ही अटका रहा।
व्यापारियों ने बताया कि धनतेरस और दिवाली से पहले का समय कारोबार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान दिल्ली के बाजारों में आसपास के शहरों से भी बड़ी संख्या में ग्राहक खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। लेकिन जाम, यातायात प्रतिबंधों और दुकानों के बंद रहने की आशंका के कारण कई ग्राहकों ने बाजारों का रुख नहीं किया।
CTI ने रैली से पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी को कई पत्र लिखकर कार्यक्रम की तारीख बदलने की मांग की थी। संगठन ने स्पष्ट किया कि उसका विरोध किसी राजनीतिक दल से नहीं, बल्कि त्योहारों के प्रमुख कारोबारी सीजन में व्यापार प्रभावित होने की आशंका से था। राहुल गांधी ने भी रैली में शामिल होने वाले लोगों से दिल्ली के बाजारों में खरीदारी कर व्यापारियों की मदद करने की अपील की थी।
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