वाराणसी में उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के पैतृक मकान को लेकर विवाद, तोड़फोड़ की कोशिश पर परिजनों ने जताई आपत्ति
वाराणसी। भारत रत्न और प्रख्यात शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के वाराणसी स्थित पैतृक मकान को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। रविवार को सराय हड़हा की भीखाशाह गली स्थित मकान के सामने वाले हिस्से को तोड़ने के लिए बिल्डर पक्ष के लोग पहुंचे तो परिजनों ने विरोध शुरू कर दिया। सूचना मिलने पर चौक पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को समझाकर शांत कराया।
परिजनों का आरोप है कि मकान में तोड़फोड़ के लिए आवश्यक अनुमति और दस्तावेज स्पष्ट नहीं किए गए हैं। वहीं, दूसरे पक्ष का कहना है कि भवन काफी जर्जर हो चुका है और उसकी मरम्मत एवं जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। पुलिस ने दोनों पक्षों से मकान से जुड़े कागजात मांगे हैं। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, संपत्ति उस्ताद के बड़े बेटे मेहताब हुसैन के नाम थी और उनके वारिसों के बीच इसे लेकर विवाद चल रहा है।
पुलिस के मुताबिक, मकान के स्वामित्व से संबंधित दस्तावेजों की जांच की गई है। दूसरे पक्ष की ओर से जीर्णोद्धार के लिए रजिस्टर्ड डेवलपर एग्रीमेंट भी दिखाया गया है। पुलिस ने दोनों पक्षों को शांति बनाए रखने और किसी भी तरह का निर्माण या तोड़फोड़ नियमानुसार अनुमति लेकर ही कराने की हिदायत दी है। आपत्ति करने वाले पक्ष को अपना मामला अदालत में रखने की सलाह दी गई है।
उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के इस मकान को लेकर विवाद करीब दस वर्षों से चला आ रहा है। इससे पहले भी वर्ष 2020 में मकान में तोड़फोड़ को लेकर विवाद हुआ था और वाराणसी विकास प्राधिकरण ने हस्तक्षेप कर काम रुकवाया था। इस वर्ष जून में नगर निगम की ओर से उस्ताद के रियाज वाले कमरे को संग्रहालय के रूप में विकसित करने की योजना भी सामने आई थी। ऐसे में ताजा विवाद के बाद उनकी स्मृतियों से जुड़े इस मकान के संरक्षण को लेकर फिर चर्चा शुरू हो गई है।
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