दिल्ली SIR: मतदाता सूची से नाम हटने पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछे सवाल
नई दिल्ली। दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कई अहम सवाल पूछे हैं। अदालत ने सवाल उठाया कि वर्ष 2026 की मतदाता सूची में पहले से शामिल रहे लोगों को नाम हटने के बाद नए मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 भरने को क्यों कहा जा रहा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फॉर्म-6 नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए है और पहले से मतदाता रहे लोगों के मामलों में उनकी परिस्थितियों के अनुरूप समाधान तलाशा जाना चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि जिन मतदाताओं को गणना फॉर्म नहीं मिला या जो अस्थायी रूप से दिल्ली से बाहर थे, उन्हें भी अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए। अदालत ने सुझाव दिया कि ऐसे लोगों को गणना फॉर्म जमा करने या पते में बदलाव की स्थिति में फॉर्म-8 भरने की अनुमति देने पर विचार किया जाए। पीठ ने 30 अक्टूबर की समयसीमा पर भी सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग से देर से प्राप्त आवेदन स्वीकार करने और समयसीमा बढ़ाने पर विचार करने को कहा।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी पूछा कि यदि कोई व्यक्ति कुछ समय के लिए काम या निजी कारणों से दिल्ली से बाहर है, तो उसे स्थायी रूप से स्थानांतरित कैसे माना जा सकता है। पीठ ने आयोग से प्रभावित मतदाताओं तक पहुंचने, उनके नामों से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने और उन्हें अपने निकटतम बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से संपर्क करने के लिए जागरूक करने की दिशा में कदम उठाने को कहा।
'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' यानी तार्किक विसंगति के मुद्दे पर भी सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में इस श्रेणी के इस्तेमाल की वैधता पर अभी अंतिम फैसला नहीं दिया गया है। पीठ ने यह भी सवाल उठाया कि जब बड़ी संख्या में मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगतियां बताई जा रही हैं, तो क्या प्रत्येक मामले की पर्याप्त मानवीय जांच की जा रही है।
चुनाव आयोग की ओर से अदालत को बताया गया कि सुझावों पर विचार किया जाएगा और आवश्यक कदम उठाने के बाद दो सप्ताह में स्थिति से अवगत कराया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई भी लगभग दो सप्ताह बाद होगी।
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