एसआईआर पर कांग्रेस का सवाल: 10 करोड़ मतदाताओं की जांच में मिले सिर्फ 1,600 विदेशी, फिर लाखों नाम क्यों कटे?
नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि छह राज्यों में करीब 10 करोड़ लोगों की मतदाता सूची की जांच के दौरान लगभग 1,600 विदेशी नागरिकों की पहचान की गई। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि एसआईआर का एक प्रमुख उद्देश्य मतदाता सूची से विदेशी नागरिकों के नाम हटाना है, तो इस प्रक्रिया में लाखों मतदाताओं के नाम क्यों काटे गए।
जयराम रमेश के मुताबिक, कर्नाटक, झारखंड, मेघालय, केरल, गोवा और मिजोरम में एसआईआर के दौरान सामने आए आंकड़े इस प्रक्रिया के उद्देश्य और उसके प्रभाव को लेकर सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें एसआईआर के उद्देश्यों को घुसपैठियों की पहचान करना, उनके नाम मतदाता सूची से हटाना और उन्हें देश से बाहर भेजना बताया गया था। कांग्रेस नेता ने पूछा कि इतने बड़े स्तर पर मतदाता सूची के पुनरीक्षण से वास्तव में क्या हासिल हुआ है।
कांग्रेस ने कर्नाटक का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां मतदाता सूची से लगभग 99.7 लाख नाम हटाए गए, जबकि 716 विदेशी नागरिकों की पहचान की गई। पार्टी के अनुसार, इनमें 545 नेपाली नागरिक शामिल थे। जयराम रमेश ने इन आंकड़ों के आधार पर आरोप लगाया कि एसआईआर के नाम पर बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों के मताधिकार पर असर पड़ने का खतरा है। उन्होंने इस प्रक्रिया को राजनीतिक साजिश बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी आरोप लगाए हैं।
कांग्रेस ने मांग की है कि एसआईआर प्रक्रिया पर रोक लगाने, मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाने की मांग पर विचार करने और चुनाव आयोग के ईसीआईनेट पोर्टल की व्यवस्था में सुधार किया जाए। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची में पारदर्शिता बनाए रखना और पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा करना आवश्यक है।
हालांकि, इन आंकड़ों को लेकर एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि निर्वाचन आयोग ने कहा है कि राज्यों से विदेशी नागरिकों की अलग-अलग संख्या का आंकड़ा जुटाने के लिए नहीं कहा गया था। कुछ राज्यों में अधिकारियों ने ऐसे मामलों का अलग रिकॉर्ड नहीं रखने की बात कही है। इसलिए छह राज्यों में सामने आए आंकड़ों को देशभर में विदेशी नागरिकों की कुल संख्या या एसआईआर के पूरे परिणाम का अंतिम आकलन नहीं माना जा सकता।
एसआईआर को लेकर विवाद के केंद्र में अब मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया, विदेशी नागरिकों की पहचान और पात्र भारतीय मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा जैसे सवाल हैं। कांग्रेस ने जहां इस प्रक्रिया पर गंभीर आपत्तियां जताई हैं, वहीं आंकड़ों के संकलन और उनकी व्याख्या को लेकर भी स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।
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